विश्व की योग राजधानी ऋषिकेश Rishikesh

विश्व की योग राजधानी ऋषिकेश Rishikesh

विश्व की योग राजधानी ऋषिकेश Rishikesh  उत्तराखण्ड के देहरादून जिले का एक नगर, हिन्दू तीर्थस्थल, नगरनिगम तथा तहसील है। यह गढ़वाल हिमालय का प्रवेश्द्वार एवं योग की वैश्विक राजधानी है। ऋषिकेश, हरिद्वार से 25 किमी उत्तर में तथा देहरादून से 43 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है।

 ऋषिकेश का शांत वातावरण कई विख्यात आश्रमों का घर है | हर साल ऋषिकेश के आश्रमों में बड़ी संख्या में तीर्थयात्री ध्यान लगाने और मन की शांति के लिए आते है |

वशिष्ठ गुफा , लक्ष्मण झूला और नीलकंठ मंदिर आदि ऋषिकेश के प्रमुख पर्यटन स्थल है |

ऋषिकेश,योग का जन्मस्थान है,एक ऐसा जगह जहां लोग ध्यान और योग करने आते हैं,और यह जगह हिंदू धर्म के अन्य पहलुओं के बारे में जानने के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। यह गंगा नदी के तट पर स्थित है,यह तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ है।

ऋषिकेश दो शब्दों के संयोजन से बना है , “ऋषिक” और “एश” | “ऋषिक” का अर्थ है “इन्द्रिया” और “एश” का अर्थ है “भगवान या गुरु”

विश्व की योग राजधानी ऋषिकेश Rishikesh प्रचलित कथाएँ

ऋषिकेश से सम्बन्धित अनेक धार्मिक कथाएँ प्रचलित हैं। कहा जाता है कि समुद्र मन्थन के दौरान निकला विष शिव ने इसी स्थान पर पिया था। विष पीने के बाद उनका गला नीला पड़ गया और उन्हें नीलकण्ठ के नाम से जाना गया।

एक अन्य अनुश्रुति के अनुसार भगवान राम ने वनवास के दौरान यहाँ के जंगलों में अपना समय व्यतीत किया था। रस्सी से बना लक्ष्मण झूला इसका प्रमाण माना जाता है।

विक्रमसंवत 1960 में लक्ष्मण झूले का पुनर्निर्माण किया गया। यह भी कहा जाता है कि ऋषि रैभ्य ने यहाँ ईश्वर के दर्शन के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान हृषीकेश के रूप में प्रकट हुए। तब से इस स्थान को ऋषिकेश नाम से जाना जाता है।

यदि आप ऋषिकेश घूमने जाने की योजना बना रहे हैं तो हम आपको यहां देखने वाली जगहों के बारे में बताते हैं।

  • लक्ष्मण झूला : लक्ष्मण झूला गंगा नदी के ऊपर बना एक प्रसिद्ध हैंगिंग ब्रिज है, जो टिहरी गढ़वाल जिले के तपोवन और पौड़ी गढ़वाल जिले के जोंक को जोड़ता है। लक्ष्मण झूला ऋषिकेश शहर के उत्तर-पूर्व में 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पूरा पुल लोहे से बना हुआ है और यह 450 फुट लंबा और गंगा नदी से 70 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। 
  • त्रिवेणी घाट : ऋषिकेश में स्नान करने का यह प्रमुख घाट है जहाँ प्रात: काल में अनेक श्रद्धालु पवित्र गंगा नदी में डुबकी लगाते हैं। कहा जाता है कि इस स्थान पर हिन्दू धर्म की तीन प्रमुख नदियों गंगा यमुना और सरस्वती का संगम होता है। इसी स्थान से गंगा नदी दायीं ओर मुड़ जाती है। गोधूलि वेला में यहाँ की नियमित पवित्र आरती का दृश्य अत्यन्त आकर्षक होता है। शाम को त्रिवेणी घाट पर आरती का दृश्य एक अलग आकर्षक एवं असीम शांति दायक होता है ।
  • वशिष्ठ गुफा : ऋषिकेश से 22 किलोमीटर की दूरी पर 3,000 साल पुरानी वशिष्ठ गुफा बद्रीनाथ-केदारनाथ मार्ग पर स्थित है। इस स्थान पर बहुत से साधुओं विश्राम और ध्यान लगाए देखे जा सकते हैं।
  • स्वर्ग आश्रम : स्वामी विशुद्धानन्द द्वारा स्थापित यह आश्रम ऋषिकेश का सबसे प्राचीन आश्रम है। स्वामी जी को ‘काली कमली वाले’ नाम से भी जाना जाता था। इस स्थान पर बहुत से सुन्दर मन्दिर बने हुए हैं। यहाँ खाने पीने के अनेक रस्तरां हैं जहाँ केवल शाकाहारी भोजन ही परोसा जाता है। आश्रम की आसपास हस्तशिल्प के सामान की बहुत सी दुकानें हैं।
  • नीलकंठ महादेव मंदिर : स्वर्ग आश्रम के ऊपर एक पहाड़ी पर ,1675 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नील्कंठ महादेव मंदिर भारत गणराज्य में भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार,मंदिर में भगवान शिव अमृता या जीवन का अमृत प्राप्त करने के लिए देवता और असुरों द्वारा सागर के मंथन के बाद जन्म लिया है।
  • बीटल्स आश्रम : सन 1960 के दशक में “बीटल्स” ऋषिकेश के पास योग का अध्यन करने के लिए आया था | तब से इस शहर ने खुद को  विश्व की योग राजधानी ऋषिकेश Rishikesh  कहा है | ऋषिकेश को केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री का प्रवेशद्वार माना जाता है।
  • भरत मन्दिर : यह ऋषिकेश का सबसे प्राचीन मन्दिर है जिसे 12 शताब्दी में आदि गुरू शंकराचार्य ने बनवाया था। भगवान राम के छोटे भाई भरत को समर्पित यह मन्दिर त्रिवेणी घाट के निकट ओल्ड टाउन में स्थित है।

    ऋषिकेश में हस्तशिल्प का सामान अनेक छोटी दुकानों से खरीदा जा सकता है। यहाँ अनेक दुकानें हैं जहाँ से साड़ियों, बेड कवर, हैन्डलूम फेबरिक, कॉटन फेबरिक आदि की खरीददारी की जा सकती है। ऋषिकेश में सरकारी मान्यता प्राप्त हैण्डलूम शॉप, खादी भण्डार, गढ़वाल वूल और क्राफ्ट की बहुत सी दुकानें हैं जहाँ से उच्चकोटि का सामान खरीदा जा सकता है। इन दुकानों से कम कीमत पर समान खरीदे जा सकते है । 

ऋषिकेश Rishikesh कैसे पहुंचें :

By Air

देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा ऋषिकेश का निकटतम हवाई अड्डा है जो लगभग 35 किलोमीटर दूर है। एयर इंडिया, स्पाइस जेट और जेट एयरवेज जैसी लोकप्रिय वाहक की नई दिल्ली से दैनिक उड़ानें हैं। दिल्ली के अलावा लखनऊ से देहरादून की उड़ान भी है। हवाई अड्डे पर पहुंचने के बाद, आप नियमित टैक्सी या बस सेवा का विकल्प चुन सकते हैं जो देहरादून से ऋषिकेश तक आसानी से उपलब्ध है। ऋषिकेश का दूसरा सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा नई दिल्ली में है जो दुनिया भर के विभिन्न शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

By Train

ऋषिकेश को निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार में है जो लगभग 25 किलोमीटर दूर है। हरिद्वार, प्रमुख भारतीय शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, लखनऊ और वाराणसी से जुड़ा हुआ है। कुछ लोकप्रिय रेलगाड़ियों में शताब्दी एक्सप्रेस, जन शताब्दी, एसी स्पेशल एक्सप्रेस और मसूरी एक्सप्रेस शामिल हैं। ऋषिकेश की यात्रा करने वालों के लिए, हरिद्वार तक ट्रेन लेने के लिए सलाह दी जाती है और फिर या तो बस या टैक्सी के माध्यम से ऋषिकेश तक जाया जा सकता है । बस में लगभग 45 मिनट लगते हैं, टैक्सी आपको करीब आधे घंटे में ऋषिकेश तक ले जाएगी।

By Road

ऋषिकेश राष्ट्रीय राजमार्ग 58 के माध्यम से अन्य शहरों से जुड़ा है, जो कि अधिकांश वर्ष के लिए अच्छी स्थिति में रहता है। पहाड़ी इलाके का छोटा भाग थोड़ी सड़कों पर हो सकता है, लेकिन पर्यटक टैक्सी लेना पसंद करते हैं या ऋषिकेश तक पहुंच सकते हैं। दिल्ली से ऋषिकेश के लिए ड्राइव लगभग 6 से 7 घंटे लगेंगे।

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About JP Dhabhai

Hi, My name is JP Dhabhai and I live in Reengus, a small town in the Sikar district. I am a small construction business owner and I provide my construction services to many companies. I love traveling solo and with my friends. You can say it is my hobby and passion.

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