हिमालय का पवित्र धाम यमुनोत्री

हिमालय का पवित्र धाम यमुनोत्री

यमुनोत्री धाम यात्रा 2022, यमुना नदी का स्रोत और हिंदू धर्म में देवी यमुना की सीट है. यह जिला उत्तरकाशी में गढ़वाल हिमालय में 3,293 मीटर (10,804 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। उत्तराखंड के चार धाम तीर्थ यात्रा में यह चार स्थलों में से एक है। यमुनोत्री का मुख्य मंदिर यमुना देवी को समर्पित है।

यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग 134 पर स्थित है। इसलिए पूरे उत्तराखंड से जानकी चट्टी (यमुनोत्री) पहुंचने के लिए बसें और टैक्सी आसानी से उपलब्ध हैं। जानकी चट्टी से यमुनोत्री मंदिर तक पहुँचने के लिए 6 किमी की पैदल दूरी है। ध्यान दें: उत्तरकाशी में दो बड़कोट स्थित हैं।

हिन्दू पंचांग के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिये खोल दिये जाते है। इस वर्ष 03 मई 2022 के दिन यमुनोत्री मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिये खोल दिए जाएंगे।

हिन्दू पंचांग के अनुसार दीपावली के बाद आने वाले भैया दूज के बाद यमुनोत्री मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते है। यमुनोत्री मंदिर के कपाट बंद होने के बाद देवी यमुना की डोली को पास के ही खरसाली गांव ले जाया जाता है, 


सर्वलोकस्य जननी देवी त्वं पापनाशिनी। आवाहयामि यमुने त्वं श्रीकृष्ण भामिनी।।
तत्र स्नात्वा च पीत्वा च यमुना तत्र निस्रता सर्व पाप विनिर्मुक्तः पुनात्यासप्तमं कुलम |

इतिहास

एक पौराणिक गाथा के अनुसार यह असित मुनि का निवास था। वर्तमान मंदिर जयपुर की महारानी गुलेरिया ने 19वीं सदी में बनवाया था। भूकम्प से एक बार इसका विध्वंस हो चुका है, जिसका पुर्ननिर्माण कराया गया। यमुनोत्तरी तीर्थ, उत्तरकाशी जिले की राजगढी(बड़कोट) तहसील में ॠषिकेश से 251 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में तथा उत्तरकाशी से 131 किलोमीटर पश्चिम -उत्तर में 3185 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।यह तीर्थ यमुनोत्तरी हिमनद से 5मील नीचे दो वेगवती जलधाराओं के मध्य एक कठोर शैल पर है।यहाँ पर प्रकृति का अद्भुत आश्चर्य तप्त जल धाराओं का चट्टान से भभकते हुए “ओम् सदृश “ध्वनि के साथ नि:स्तरण है।तलहटी में दो शिलाओं के बीच जहाँ गरम जल का स्रोत है,वहीं पर एक संकरे स्थान में यमुनाजी का मन्दिर है।वस्तुतः शीतोष्ण जल का मिलन स्थल ही यमुनोत्तरी है।(यमुनोत्तरी का मार्ग) हनुमान चट्टी (2400मीटर) यमुनोत्तरी तीर्थ जाने का अंतिम मोटर अड्डा है।इसके बाद नारद चट्टी,फूल चट्टी व जानकी चट्टी से होकर यमुनोत्तरी तक पैदल मार्ग है।इन चट्टीयों में महत्वपूर्ण जानकी चट्टी है,क्योंकि अधिकतर यात्री रात्रि विश्राम का अच्छा प्रबंध होने से रात्रि विश्राम यहीं करते हैं।कुछ लोग इसे सीता के नाम से जानकी चट्टी मानते हैं,लेकिन ऐसा नहीं है।1946में एक धार्मिक महिला जानकी देवी ने बीफ गाँव में यमुना के दायें तट पर विशाल धर्मशाला बनवाई थी,और फिर उनकी याद में बीफ गाँव जानकी चट्टी के नाम से प्रसिद्ध हो गया।यहीं गाँव में नारायण भगवान का मन्दिर है।

पहले हनुमान चट्टी से यमुनोत्तरी तक का मार्ग पगडंडी के रूप में बहुत डरावना था,जिसके सुधार के लिए खरसाली से यमुनोत्तरी तक की 4मील लम्बी सड़क बनाने के लिए दिल्ली के सेठ चांदमल ने महाराजा नरेन्द्रशाह के समय 50000रुपए दिए।पैदल यात्रा पथ के समय गंगोत्री से हर्षिल होते हुए एक “छाया पथ “भी यमुनोत्तरी आता था।यमुनोत्तरी से कुछ पहले भैंरोघाटी की स्थिति है।जहाँ भैंरो का मन्दिर है।अनेक पुराणों में यमुना तट पर हुए यज्ञों का तथा कूर्मपुराण (39/9_13)में यमुनोत्तरी माहात्म्य का वर्णन है।

केदारखण्ड(9/1-10)में यमुना के अवतरण का विशेष उल्लेख है।इसे सूर्यपुत्री,यम सहोदरा और गंगा- यमुना को वैमातृक बहने कहा गया है।ब्रह्मांड पुराण में यमुनोत्तरी को”यमुना प्रभव”तीर्थ कहा गया है।ॠग्वेद (7/8/19)मे यमुना का उल्लेख है।महाभारत के अनुसार जब पाण्डव उत्तराखंड की तीर्थयात्रा में आए तो वे पहले यमुनोत्तरी,तब गंगोत्री फिर केदारनाथ-बद्रीनाथजी की ओर बढ़े थे,तभी से उत्तराखंड की यात्रा वामावर्त की जाती है।हेमचन्द्र ने अपने “काव्यानुशान “मे कालिन्द्रे पर्वत का उल्लेख किया है,जिसे कालिन्दिनी(यमुना) के स्रोत प्रदेश की श्रेणी माना जाता है।डबराल का मत है कि कुलिन्द जन की भूमि संभवतः कालिन्दिनी के स्रोत प्रदेश में थी।अतः आज का यमुना पार्वत्य उपत्यका का क्षेत्र, जो रंवाई,जौनपुर जौनसार नामों से जाना जाता है,प्राचीनकाल में कुणिन्द जनपद था।

“महामयूरी”ग्रंथ के अनुसार यमुना के स्रोत प्रदेश में दुर्योधन यक्ष का अधिकार था।उसका प्रमाण यह है कि पार्वत्य यमुना उपत्यका की पंचगायीं और गीठ पट्टी में अभी भी दुर्योधन की पूजा होती है।यमुना तट पर शक और यवन बस्तियों के बसने का भी उल्लेख है।काव्यमीमांसाकार ने 10वीं शताब्दी में लिखा है कि यमुना के उत्तरी अंचलों में जहाँ शक रहते हैं,वहाँ यम तुषार- कीर भी है।इस प्रकार यमुनोत्तरी धार्मिक और ऐतिहासिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही।(तप्तकुण्ड व अन्य कुण्ड) यमुनोत्तरी पहुँचने पर यहाँ के मुख्य आकर्षण यहाँ के तप्तकुण्ड हैं।इनमें सबसे तप्त जलकुण्ड का स्रोत मन्दिर से लगभग 20फीट की दूरी पर है,केदारखण्ड वर्णित ब्रह्मकुण्ड अब इसका नाम सूर्यकुण्ड एवं तापक्रम लगभग 195डिग्री फारनहाइट है,जो कि गढ़वाल के सभी तप्तकुण्ड में सबसे अधिक गरम है।इससे एक विशेष ध्वनि निकलती है,जिसे “ओम् ध्वनि”कहा जाता है।इस स्रोत में थोड़ा गहरा स्थान है।जिसमें आलू व चावल पोटली में डालने पर पक जाते हैं,हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में मणिकर्ण तीर्थ में स्थित ऐसे ही तप्तकुण्ड को “स्टीम कुकिंग”कहा जाता है।सूर्यकुण्ड के निकट दिव्यशिला है।जहाँ उष्ण जल नाली की सी ढलान लेकर निचले गौरीकुण्ड में जाता है,इस कुण्ड का निर्माण जमुनाबाई ने करवाया था,इसलिए इसे जमुनाबाई कुण्ड भी कहते है।इसे काफी लम्बा चौड़ा बनाया गया है,ताकि सूर्यकुण्ड का तप्तजल इसमें प्रसार पाकर कुछ ठण्डा हो जाय और यात्री स्नान कर सकें। गौरीकुण्ड के नीचे भी तप्तकुण्ड है।यमुनोत्तरी से 4मील ऊपर एक दुर्गम पहाड़ी पर सप्तर्षि कुण्ड की स्थिति बताई जाती है।विश्वास किया जाता है कि इस कुण्ड के किनारे सप्तॠषियों ने तप किया था।दुर्गम होने के कारण साधारण व्यक्ति यहाँ नहीं पहुँच सकता।

स्थानीय लोगों का कहना है कि आजसे लगभग 60साल पहले विष्णुदत्त उनियाल वहाँ गए थे।लौटते समय उन्होंने वहाँ एक शिवलिंग देखा।जैसे ही वह उसे उठाने के लिए हुए वह गायब हो गया।


यमुनोत्री धाम यात्रा 2022

आज आप जो मंदिर का वर्तमान स्वरूप देख रहे है उसका निर्माण गढ़वाल के राजा प्रताप शाह के द्वारा करवाया गया है। 

मंदिर के गृभगृह में देवी यमुना की काले संगमरमर के पत्थर से बने हुए विग्रह की स्थापना की गई है। मंदिर में देवी यमुना की पूरे विधि विधान के साथ पूजा की जाती है। इस मंदिर में स्थानीय निवासी अपने पितरों का पिंडदान किया करते है, ऐसा माना जाता है कि यहाँ पर पिंडदान करने पर मृत व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मंदिर परिसर में एक विशाल शिला स्तभ भी है जिसे दिव्यशिला के नाम से जाना जाता है।

यमुनोत्री धाम यात्रा 2022 : यमुनोत्री धाम कैसे पहुंचे?

हवाई मार्ग से: निकटतम हवाई अड्डा जॉली ग्रांट, देहरादून है।

ट्रेन द्वारा: केवल ऋषिकेश तक रेलवे की सुविधा है । इसके बाद आपको निजी टैक्सियों या बसों का लाभ उठाना होगा। आपको हरिद्वार या ऋषिकेश से साझा जीप या इसी तरह के वाहन मिल जायेगे । इनोवा, टवेरा, क्वालिस, स्कॉर्पियो आदि जैसे एसयूवी या एमयूवी की सुविधा हर समय उपलब्ध है | निकटतम रेलवे स्टेशन हरिद्वार, देहरादून, कोटद्वार और काठगोदाम हैं।

सड़क मार्ग से: यमुनोत्री जाने के लिए सबसे अच्छा मार्ग देहरादून और बरकोट है। अगर आप हरिद्वार-ऋषिकेश से आ रहे हैं तो यमुनोत्री के लिए रास्ता धरासू द्विभाजन बिंदु अलग होता है | यमुनोत्री हरिद्वार, देहरादून, चंबा, टिहरी, बरकोट, हनुमान चट्टी और जानकी चट्टी से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

हनुमान चट्टी से फूल चट्टी तक जीप द्वारा 5 किमी, फूल चट्टी से जानकी चट्टी तक 3 किमी पैदल मार्ग और जानकी चट्टी से यमुनोत्री तक 5 किमी का पैदल मार्ग (यमनोत्री तक 8 किमी ट्रेक) है |

यमुनोत्री धाम यात्रा 2022 : चार धाम की यात्रा पर जाने से पहले रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है. आप उत्तराखंड में चार धाम यात्रा के लिए registrationandtouristcare.uk.gov.in पर अपना रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. रजिस्ट्रेशन के बाद आपको क्यूआर कोड के साथ यात्रा रजिस्ट्रेशन जनरेट करना होगा. इसका वेरिफिकेशन धाम पर होगा.

Generic placeholder image
About JP Dhabhai

Hi, My name is JP Dhabhai and I live in Reengus, a small town in the Sikar district. I am a small construction business owner and I provide my construction services to many companies. I love traveling solo and with my friends. You can say it is my hobby and passion.

Posted on by

Leave a Reply